भारत में लोगों के खर्च करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब नकद भुगतान की जगह डिजिटल लेनदेन और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश में क्रेडिट कार्ड से कुल खर्च ₹23.62 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते उपभोग, डिजिटल भरोसे और बदलती जीवनशैली की बड़ी तस्वीर दिखाता है। एसबीआई कार्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में इस समय करीब 11.86 करोड़ क्रेडिट कार्ड सक्रिय हैं। बढ़ती आय, ऑनलाइन खरीदारी, आसान ईएमआई और यूपीआई आधारित भुगतान ने इस बाजार को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। खास बात यह है कि अब यह बदलाव केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों में भी तेजी से फैल रहा है।
ऑनलाइन खर्च बना सबसे बड़ा चालक
क्रेडिट कार्ड बाजार में सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल खर्च के रूप में दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल रिटेल खर्च का लगभग 62.5% हिस्सा अब ऑनलाइन माध्यमों से हो रहा है। लोग किराना, बिजली बिल, पेट्रोल, रेस्टोरेंट, कपड़े और यात्रा जैसी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दे रहे हैं। एसबीआई कार्ड के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रिटेल खर्च 15% बढ़कर ₹3.54 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह बताता है कि ग्राहक अब केवल बड़े खर्चों के लिए नहीं, बल्कि दैनिक उपयोग के लिए भी कार्ड पर भरोसा कर रहे हैं। डिजिटल भुगतान का यह बढ़ता चलन ई-कॉमर्स कंपनियों, ऑनलाइन सेवाओं और बैंकिंग क्षेत्र के लिए बड़ा अवसर बनता जा रहा है।
मार्च में खर्च ने पकड़ी तेज रफ्तार
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 में क्रेडिट कार्ड खर्च तीन महीने के उच्च स्तर ₹2.19 लाख करोड़ पर पहुंच गया। फरवरी के मुकाबले यह लगभग 24% अधिक रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष के आखिरी महीने में टैक्स भुगतान, यात्रा, खरीदारी और कारोबारी लेनदेन बढ़ने से खर्च में यह तेजी आई। मार्च महीने में:
- पॉइंट ऑफ सेल खर्च 16% बढ़ा
- ई-कॉमर्स भुगतान 28% उछला
- कुल लेनदेन संख्या में 25% की वृद्धि दर्ज हुई
इस दौरान एचडीएफसी बैंक, एसबीआई कार्ड, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े कार्ड जारी करने वाले बैंकों ने मजबूत वृद्धि दर्ज की।
छोटे शहर बने नए विकास केंद्र कुछ साल पहले तक क्रेडिट कार्ड का उपयोग मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में तेजी से कार्ड उपयोग बढ़ रहा है। एसबीआई कार्ड के अनुसार:
- 77% यूपीआई सक्रिय क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ता छोटे शहरों से हैं
- 81% यूपीआई आधारित कार्ड खर्च भी इन्हीं शहरों से आ रहा है
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है कि डिजिटल बैंकिंग और औपचारिक वित्तीय सेवाओं की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। सरल मोबाइल इंटरनेट, यूपीआई और ऑनलाइन खरीदारी ने छोटे शहरों के ग्राहकों को भी डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया है।
यूपीआई और क्रेडिट कार्ड का नया गठजोड़ भारत में यूपीआई पहले ही भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। अब क्रेडिट कार्ड को यूपीआई से जोड़ने के बाद इसका उपयोग और तेजी से बढ़ रहा है। लोग अब छोटे-छोटे भुगतान भी क्रेडिट कार्ड से यूपीआई के जरिए कर रहे हैं। किराना दुकान, पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट और स्थानीय व्यापारियों तक में इसका उपयोग बढ़ा है। एसबीआई कार्ड के अनुसार, यूपीआई से जुड़े क्रेडिट कार्ड खर्च में तिमाही आधार पर 10% से ज्यादा वृद्धि हुई है। इस बदलाव से:
- ग्राहकों को अतिरिक्त क्रेडिट सुविधा मिल रही है
- डिजिटल भुगतान का दायरा बढ़ रहा है
- बैंक और कार्ड कंपनियों के लिए नए ग्राहक जुड़ रहे हैं
ईएमआई और मल्टी कार्ड उपयोग तेजी से बढ़ा बढ़ती महंगाई और महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामानों के बीच लोग अब ईएमआई का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं। मोबाइल, टीवी, लैपटॉप, घरेलू उपकरण और फर्नीचर जैसी खरीदारी में कार्ड आधारित ईएमआई तेजी से बढ़ रही है। एसबीआई कार्ड के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ईएमआई खर्च में दो अंकों की वृद्धि दर्ज हुई। इसके साथ ही अब ग्राहक अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग कार्ड रखने लगे हैं। उदाहरण के तौर पर:
- यात्रा के लिए ट्रैवल कार्ड
- पेट्रोल के लिए फ्यूल कार्ड
- ऑनलाइन खरीदारी के लिए शॉपिंग कार्ड
- स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल के लिए विशेष कार्ड
यह बदलाव बताता है कि ग्राहक अब केवल भुगतान नहीं, बल्कि अधिकतम लाभ और रिवॉर्ड पर भी ध्यान दे रहे हैं।
निजी बैंकों का दबदबा लगातार बढ़ा भारतीय क्रेडिट कार्ड बाजार में निजी बैंकों की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार:
- निजी बैंकों की हिस्सेदारी बढ़कर 71% से ज्यादा हो गई
- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी लगभग 24% रही
- विदेशी बैंकों की हिस्सेदारी लगातार घट रही है
एचडीएफसी बैंक अभी भी सबसे बड़ा खिलाड़ी बना हुआ है। वहीं एसबीआई कार्ड सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी कंपनियों में शामिल रहा। मार्च 2026 तक:
- एचडीएफसी बैंक का खर्च बाजार हिस्सेदारी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
- एसबीआई कार्ड का खर्च 31% बढ़ा
- आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक ने भी मजबूत वृद्धि दर्ज की
बढ़ते जोखिमों ने बैंकों को किया सतर्क हालांकि बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी बढ़ रहे हैं। पिछले दो वर्षों में बिना गारंटी वाले कर्ज में बढ़ती देरी के कारण बैंक अब सतर्क हो गए हैं। इसी वजह से:
- नए कार्ड जारी करने की रफ्तार धीमी हुई
- बैंकों ने कई कार्ड लाभ कम किए
- जोखिम प्रबंधन पर ज्यादा फोकस बढ़ा
वित्त वर्ष 2024 में जहां कार्ड जारी करने की वृद्धि 19% थी, वहीं अब यह घटकर करीब 8% रह गई है। रिजर्व बैंक भी नियमों को सख्त कर रहा है ताकि ग्राहक अनियंत्रित कर्ज के जाल में न फंसें।
आगे क्या संकेत मिल रहे हैं? भारत का क्रेडिट कार्ड बाजार अब केवल शहरी सुविधा नहीं, बल्कि देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। बढ़ती आय, ऑनलाइन खरीदारी, यूपीआई और डिजिटल बैंकिंग ने इस क्षेत्र को नई ताकत दी है। हालांकि आने वाले समय में बाजार की वृद्धि पहले जैसी विस्फोटक नहीं रह सकती, लेकिन उपयोग और डिजिटल पहुंच लगातार बढ़ती रहने की संभावना है। जो कंपनियां:
- डिजिटल सेवाओं पर फोकस करेंगी
- छोटे शहरों में पहुंच बढ़ाएंगी
- बेहतर रिवॉर्ड और सुरक्षित क्रेडिट देंगी
वे इस तेजी से बदलते बाजार में सबसे आगे दिखाई दे सकती हैं। भारत की अर्थव्यवस्था जिस तेजी से डिजिटल हो रही है, उसे देखते हुए यह साफ है कि आने वाले वर्षों में क्रेडिट कार्ड केवल भुगतान का साधन नहीं, बल्कि उपभोग और डिजिटल वित्तीय व्यवस्था का मजबूत आधार बनेंगे।